हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद किन गतिविधियों से बचना चाहिए?(What Activities Should I Avoid After Hip Replacement Surgery?)

Post by DoctoriDuniya

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शल्यचिकित्सा के द्वारा गठिया से पीड़ित दर्दनाक कूल्हे की हड्डीओ को कृत्रिम विधि द्वारा प्लास्टिक या धातु के घटकों से बने जोड़ से प्रतिस्थापित किया जाता है।
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कब हो सकती है?
यह आमतौर पर तब किया जाता है जब अन्य सभी उपचार गठिया के दर्द को राहत प्रदान करने में असमर्थ हों और यह दर्द असहनीय हो गया हो।यह दर्द से छुटकारा पाने का आखिरीइलाज है।
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान क्या होता है?
हिप प्रतिस्थापन सर्जरी एडवांस मेडिकल तकनीक है जिसमे एक छोटे चीरे के द्वारा कूल्हे की हड्डी को हटा दिया जाता है,फिर कृत्रिम जोड़ या सीमेंट या एक विशेष सामग्रियों का उपयोगकरके नए जोड़ों की हड्डी को संलग्न किया जाता है।इस प्रक्रिया के दौरान मरीज बेहोश रहता है जिससे वह सर्जरी के दौरान किसी भी दर्द को महसूस नहीं कर पाता है ।इस प्रक्रिया के दौरान कूल्हे के किनारे 8 से 10 इंच का चीरा लगाया जाता है।हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि इस तकनीक में सर्जन अत्यधिक कुशल हो।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद क्या होता है?
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद मरीज़ को 4 से 6 दिनों के लिए अस्पताल में ही रहना पड़ता है।उसके बाद मरीज़ को चलने के लिए कुछ दिनों तक एक वॉकर या बैसाखी की सहायता लेनी पड़ती है।
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद किन गतिविधियों से बचना चाहिए?
1 अधिक पैर को घुमाने से बचें
2 कमर व पैर पर अधिक ज़ोर देने से बचें
3 अधिक घुकने से बचें
4आपके कूल्हे के संयुक्त रूप से ठीक होने के बाद भी, आपको कुछ खेल या भारी गतिविधि से बचना चाहिए।
5 सीढ़ी को कम से कम इस्तेमाल करे
6 एक फर्म, सीधे-पीछे की कुर्सी का इस्तेमालकरें
अधिक से अधिक गिरने से बचे
8 एक ऊंचे टॉयलेट सीट का उपयोग करें इससे आपको कूल्हों पर बहुत दूर झुकने में मदद मिलेगी।
9 ड्राइविंग और व्यायाम जैसी गतिविधियों को वापस करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।

क्या हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सुरक्षित है?
हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सालों से की जा रही सर्जरि में से एक है जिसमे समय के साथ साथ सुधार किया जा रहा है।हर एक सर्जरि की तरह इस सर्जरि मे भी जोखिम है जिसमे इन्फ़ैकशनव ब्लीडिंग होने का खतरा बना रहता है। सर्जरि के बाद पैर की लंबाई में भी परिवर्तन हो सकता है।अस्थि मज्जा में वसा के टुकड़े ढीले हो सकते हैं जो खून में प्रवेश कर लेते हैं और फेफड़ों में आ जाते हैं, जिससे गंभीर श्वास की समस्या हो सकती है। कूल्हे के क्षेत्र में नसों मे सूजन भी बनी रह सकती हैं।

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